गुलमोहर

अंजना वर्मा

नीले गगन में गीत प्यार का गा रहे,
गुलमोहर छा रहे।

 

डूबकर खत लिखे, लाल रोशनाई से
कूक रही कोयलिया बेकल अमराई से।
मंजरियाँ लिए पेड़, शीश हैं झुला रहे।

 

हवा चली हरफ-हरफ सड़कों पर बिखर गये
केसरिया लाल रंग धरती पर निखर गये।
संदेशा प्यार का दूर तक लुटा रहे।

 

ख़ुशबू हवाओं में , फैला ख़ुमार है,
हर तरफ़ बह रहा प्यार ही प्यार है
मौसम बहार का यूँ ही बना रहे। 
 

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