चाँदनी रात
गर्म साँस
तपती द~ह
करोड़ों क़समों का
युगों से
गवाह बना,
ए चाँद,
बता 
कितनी क़समें 
कितनी बातें
कितने वादे
पूरे हुए 
कितने अधूरे रहे
कुछ हिसाब है तेरे पास!
रहने दे 
तू केवल देखता है
बोलता कुछ नहीं।

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