गलियों गलियों शोर मचा है

01-03-2019

गलियों गलियों शोर मचा है

अखिल भंडारी

गलियों गलियों शोर मचा है
घर में इक सन्नाटा सा है

कौन यहाँ रहता था पहले
अब वो शख़्स कहाँ रहता है

उजले उजले कपड़ों वाले
मिट्टी में क्या ढूँढ रहा है

बादल के साये में रह कर
सूरज से झगड़ा करता है

जिस का रस्ता देख रहे थे
वो तो रस्ता बदल चुका है

बुझा बुझा सा उस का चेहरा
उस के दिल में क्या रहता है

इस से तो ख़ामोशी बेहतर
इन बातों में क्या रखा है

कैसा झगड़ा तेरा मेरा
ना कुछ तेरा ना मेरा है

0 Comments

Leave a Comment