आरम्भ...
प्रिय लिखूँ
या फिर प्रियतमा कहूँ
बेवफ़ा लिख नहीं सकता
वफ़ा तुमसे ही तो सीखी है.....!

 

संघर्ष....
तपिश ज़िंदगी की
तो कभी जला न सकी
तेरे वादों से जितना जला हूँ
मैं तो नेमत थी क़ुदरत की
आसमां के तले ही पला हूँ.....!
भूख मिटती अगर रोटी से
कोई भूखा न होता
छलावों भरी इस दुनिया में
काश धोखा न होता .....!

 

उपसंहार....
वे गलियाँ
वो शहर आज भी वैसे होंगे
यादों के यादों से
बदन वैसे ही मिलते होंगे.....!
दिए यादों के बुझा आया हूँ
छोड़ ये ख़त तेरे लिए

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें


  BENCHMARKS  
Loading Time: Base Classes  0.5873
Controller Execution Time ( Entries / View )  0.8286
Total Execution Time  1.4201
  GET DATA  
No GET data exists
  MEMORY USAGE  
65,295,088 bytes
  POST DATA  
No POST data exists
  URI STRING  
entries/view/ek-khat
  CLASS/METHOD  
entries/view
  DATABASE:  v0hwswa7c_skunj (Entries:$db)   QUERIES: 58 (0.7222 seconds)  (Show)
  HTTP HEADERS  (Show)
  SESSION DATA  (Show)
  CONFIG VARIABLES  (Show)