उदित होता हुआ
नन्हा लाल सूरज
एक दिशा की पहचान है
यह पूरब है
एक दिशा है
इसी तरह उत्तर 
दक्षिण पश्चिम 
उपर-नीचे दाँए-बाँए भी 
एक दिशा है
हर कर्म हर स्वभाव
हर जीव हर जीवन
हर उन्नति
हर अवनति की
एक दिशा है
अज्ञान भी एक दिशा है
और ज्ञान की भी 
एक दिशा है  

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

किशोर साहित्य कविता
कविता
हास्य-व्यंग्य कविता
बाल साहित्य कविता
नज़्म
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में