अंधापन और बहरापन
इन दोनों का होना
अपने नैतिकता के ख़िलाफ़ एक जंग है
पुरुष होकर पुरुषत्व के ख़िलाफ़ होना
स्त्री होकर स्त्रीत्व के ख़िलाफ़ होना
अपने प्रति अंधे मोह को तोड़ना
पुराने और सड़ते स्वरूप का
एक नवीन परिवर्तन होता है,
और मानवता के शोर में,
अपने प्रति एक
बेजोड़ शांति की शुरुआत है।

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