चलो होली मनाएँ

01-04-2021

चलो होली मनाएँ

डॉ. सुशील कुमार शर्मा

भूलकर सब वर्जनाएँ
चलो होली मनाएँ।
 
वास्तविकता की धरा पर
अंध सपने छोड़ कर।
भूलकर सब भूत बातें
समय का मुख मोड़ कर।
 
सर्जना के शिखर चढ़ कर
चलो सपने सजाएँ।
 
है भले घनघोर तम पर
एक दीपक जल रहा।
शूल कंटक पथ बिछे पर
तन अनवरत चल रहा।
 
रँग श्रम के अंग लेकर
चलो पर्वत नवाएँ।
 
है प्रभंजन घोर झंझा
घाव पग पग हरे हैं।
है सफलता दूर लेकिन
आस से मन भरे हैं।
 
प्रेम के सब रंग लेकर
चलो सूरज झुकायें।
 
प्रेम की रोली लगा कर
स्नेह अभिनंदन करें
कलुष मन का हम मिटायें
सोच को चंदन करें।
 
रंग में सब नेह डाले
चलो भूलें व्यथाएँ।

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