भूखा हूँ माँ!

04-02-2015

भूखा हूँ माँ!

डॉ. रामकेश्वर तिवारी

माँ अपने रक्तकणों से सिंचित कर
अपने चेहरे को मुझमें प्रतिबिम्बित कर
क्यांे मुझे तुमने युवा किया?
पुनः मुझे अवस्था बाला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।1।

 

न जाने उम्र के इस दहलीज़ पर
क्यों रख दी तुम मुझे लीज पर?
नहीं चाहिए था तुम्हे ऐसा करना,
अपने स्नेह का शिवाला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।2।

 

बचपन में भूखने पर भोजन देती
ज़िद पर अड़ने पर चाँद ना देती,
अब क्यों मुझे दे दी वैसी पूर्ण चाँद?
मुझे जीवन पुनः बचपन वाला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।3।

 

युवा होने पर तूने क्यों दूर किया?
मुझे परवश होने को क्यों मजबूर किया?
क्या तुमने किया है मेरे साथ न्याय?
ठंड लग रही है आँचल का पाला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।4।

 

तुम्हारा मस्तक उँचा करने को करता हूँ हर कर्म
प्रतिकर्मों में स्मरण कर निभाता शैशवधर्म,
बचपन में तुम देती थी जो आशीष, वही
कुलदीपक बनने की, आशीषप्याला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।5।

 

कुछ नया करने को सोचता प्रतिपल
तुम्हे महसूस करके जीता पल दो पल,
अपने विचार वितर्कों से रोज़ जीता - मरता हूँ,
मातः! स्वहृदय की रजनीबाला दे दो ना!।
भूखा हूँ माँ निवाला दे दो ना!।6।

0 Comments

Leave a Comment

लेखक की अन्य कृतियाँ

शोध निबन्ध
सामाजिक आलेख
कविता
साहित्यिक आलेख
विडियो
ऑडियो