बारिशों में भीग जाना सीखिये

15-11-2008

बारिशों में भीग जाना सीखिये

नीरज गोस्वामी

मुश्किलों में मुस्कुराना सीखिये
फूल बन्जर में उगाना सीखिये

जो चले परचम उठाकर दोस्तों
साथ उसका ही निभाना सीखिये

खिड़कियों से झाँकना बेकार है
बारिशों में भीग जाना सीखिये

आँधियाँ जब दे रही हो दस्तकें
तब दिये की लौ बचाना सीखिये

ताक पर धरके उसूलों को कभी
नाम अपना मत कमाना सीखिये

खामशी से आज सुनता कौन है
शोर महफ़िल में मचाना सीखिये

डालिये दरिया में यूँ मत नेकियाँ
अब भला करके जताना सीखिये

तान के रखिये इसे हरदम मगर
सर किसी दर पे झुकाना सीखिये

भीगती 'नीरज' किसी की याद से
आँख को सबसे छुपाना सीखिये

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