आसान नहीं होता पढ़ना भी

15-09-2019

आसान नहीं होता पढ़ना भी

डॉ. शैलजा सक्सेना

लिखना अगर मुश्किल है
तो
आसान नहीं होता 
किसी और के लिखे को पढ़ लेना।


अपने को किसी और के हवाले कर देना
उसके साथ क़दम से क़दम मिला,
अनजानी राहों पर चल देना
जहाँ वो रुके,
वहाँ रुक जाना।
जहाँ वो रोए,
वहाँ रो देना।
उसके दिखाए रास्तों से
अपनी मुक्ति का रास्ता खोज लेना।
आसान नहीं होता,
आसान नहीं होता किसी और के लिखे को पढ़ लेना।


आसान नहीं होता
सब कुछ के भीतर से,
उसके असली चेहरे को देख लेना,
देख कर समझ लेना,
समझ कर जाँच लेना
उसे प्यार कर लेना,
या नफ़रत
या असंपृक्त सा छोड़कर चल देना।
आसान नहीं होता किसी और के लिखे को पढ़ लेना।


आसान नहीं होता,
समय को लाँघ,
दिशाओं को पीछे छोड़
डुबकियाँ लगाना
अनजान मन के समुद्रों में,
दूसरे के आँसुओं के खारेपन को,
अपने जीभ पर टटोलना
और 
उसकी हँसी की मुक्ता सीपियों में अपनी हँसी रख देना,
आसान नहीं होता,
बिल्कुल आसान नहीं होता किसी और के लिखे को पढ़ लेना


अगर वाक़ई में उसने कुछ लिखा है तो।

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