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05.31.2008
 

फेरीवाला
[’तुम्हें सौंपता हूँ’ से]
त्रिलोचन शास्त्री
चयन : डॉ. शैलजा सक्सेना


सपने लो सपने लो

मीठे मीठे सपने

अच्छे अच्छे सपने

अपने मन के सपने

सपने लो

 

सपनों से ही मेरी झोली भरी हुई है –

घर के बाहर के

पास के पड़ोस के

देस के बिदेस के

भूखे ग्रहलोक के

नदी के समुद्र के

जहाज के विमान के

पर्वत के बादल के

मुक्ति के विधान के,

-          सपने ले, मन चीते सपने लो

जिसका विश्वास टूट गया हो

साथ और कोई न हो

वह मेरे सपने ले

जिसका बल, अवसर पर धोखा दे जाता हो

वह मेरे सपने ले

जिसको कुछ करने की, भलीभाँति जीने की, इच्छा हो

वह मेरे सपने ले

जिसको इच्छा-मरण पसन्द हो चला आये

वह मेरे सपने ले

 

गाँव-गाँव नगर-नगर गली-गली डगर-डगर

मैं पुकार रहा हूँ : सपने लो सपने लो

नये-नये सपने लो, अच्छे-अच्छे सपने लो

सपने लो


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