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05.31.2008
 

आज मैं अकेला हूँ 
[’धरती’ से]
 
त्रिलोचन शास्त्री
चयन : डॉ. शैलजा सक्सेना


[१]

आज मैं अकेला हूँ

अकेले रहा नहीं जाता

[२]

जी व न मि ला है य ह

र त न मि ला है य ह

         धूल में

               कि

                     फूल में

   मिला है

         तो

               मिला है यह

   मो ल – तो ल इ स का

   अ के ले क हा न हीं जा ता

[३]

 सु ख आ ये दु ख आ ये

दि न आ ये रात आ ये

फूल में

         कि

               धूल में

आये

         जैसे

               जब आये

सु ख दु ख ए क  भी

अ के ले स हा न हीं जाता

[४]

च र ण हैं च ल ता हूँ

च ल ता हूँ च ल ता हूँ

फूल में

         कि

               धूल में

च ला ता

         मन

               चलता हूँ

ओ खी धा र दि न की

अ के ले ब हा न हीं जा ता

 


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