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ISSN 2292-9754

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12.20.2017


सुदर्शन सोनी के उपन्यास ‘आरोहण’ का 5 नवम्बर 2017 को भोपाल में विमोचन संपन्न
प्रियदर्शी खैरा
अध्यक्ष, भोजपाल साहित्य संस्थान

सुदर्शन सोनी के उपन्यास ‘आरोहण’ का विमोचन कार्यक्रम दिनांक 5 नवम्बर 2017 को स्वामी विवेकानन्द लायब्रेरी, भोपाल में मूर्धन्य पत्रकार व साहित्यकार श्री महेश श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य, प्रख्यात शिक्षाविद व साहित्यकार तथा आईसेक्ट ग्रुप के चेयरमेन डॉक्टर संतोष चौबे की अध्यक्षता व डॉक्टर उमेश कुमार सिंह, निदेशक, मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य अकादमी के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ से किया गया।

भोजपाल साहित्य संस्थान के अध्यक्ष प्रसिद्ध व्यंग्यकार प्रियदर्शी खैरा द्वारा सुदर्शन सोनी के उपन्यास व उनकी साहित्यिक यात्रा के संबंध में आधार वक्तव्य दिया गया। उन्होंने कहा कि सुदर्शन सोनी के इसके पूर्व तीन लघुकथा संग्रह “नजरिया”, “यथार्थ”, “जिजीविषा” व दो व्यंग्य संग्रह “घोटालेबाज न होने का गम” व “महँगाई का षुक्ल पक्ष” प्रकाशित हो चुके हैं। श्री सुदर्शन सोनी द्वारा उपन्यास की रचना प्रक्रिया के बारे में बोलते हुये कहा कि उपन्यास को पूर्ण करने में तीन वर्ष लगे कई बार एडीटिंग करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उपन्यास में मद्यनिषेध व महिला सशक्तिकरण के विषय को विस्तार से उठाया गया है। प्रसंगवश आज बिहार व केरल में मधनिषेध गुजरात के बाद लागू हो गया है तथा पूरे देश में मधनिषेध की माँग उठ रही है। उन्होंने उपन्यास के एक अंश का वाचन भी किया।

श्री मकरंद देवस्कर आईजी पुलिस द्वारा कहा गया कि उपन्यास गहरे आशावाद की बात को आगे बढ़ाता है। उपन्यास यह रेखाकिंत करता है कि यदि किसी चीज़ को क़ानूनी जामा पहनाया जाये तो वह जल्दी सफल हो सकती है, बनिस्बत इसके की पहले प्रयास किये जायें और बाद में क़ानून बनाया जाये। उन्होंने कहा कि उपन्यास जिस गहरे आशावाद के परिणामों की अपेक्षा रखता है उनके विचार से यह इतना आसान नहीं है। उपन्यास में लेखक ने सू़त्रधार का काम किया है। चन्द्रभान राही द्वारा कहा गया कि यह भी उपन्यास लेखन की एक विधा है।

डॉक्टर उमेश कुमार सिंह द्वारा कहा गया कि उपन्यास में महिला सशक्तिकरण की बात की गयी है, यह पश्चिम से आयी संकल्पना है, वास्तव में तो हमारे यहाँ की नारी इतनी सशक्त है कि उसकी नहीं हमारे स्वयं के सशक्तिकरण की आवश्यकता है। आज पढ़ा कम जा रहा है, लिखा ज़्यादा जा रहा है। यह संतोष की बात है कि श्री सोनी को इस उपन्यास को पूर्ण करने में तीन वर्ष से अधिक का समय लगा।

श्री महेश श्रीवास्तव द्वारा कहा गया कि सुदर्शन सोनी के उपन्यास का जो अंश उन्होंने पढ़ा और उसमें जो थानेदार के किरदार का ज़िक्र आया उसमें और आज के परिवेश में भी कोई बदलाव नहीं लगता। भोपाल में चार दिन पहले कोचिंग से लौट रही छात्रा के साथ हुई दुराचार की घटना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है। सफल लेखन का मतलब होता है स्वयं आनंदित होना व पढ़ने वाले को भी आनंद प्रदान करना। उन्होंने कहा कि उपन्यास में मद्यनिषेध का महत्वपूर्ण विषय उठाया जाकर आज के विपरीत माहौल में आशावाद को आगे बढ़ा गया है। उपन्यास में भाषा का प्रवाह बनाये रखना एक चुनौती होती है। उन्होंने लेखक को ’आरोहण’ की शुभकामनायें देते हुये भविष्य में और भी अच्छा उपन्यास रचने की आशा की।

विख्यात साहित्यकार व शिक्षाविद डॉक्टर संतोष चौबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि उन्होंने पूरा उपन्यास पढ़ा है और यह उन्हें काफी अच्छा लगा। हाँ, अध्याय ज़रूर छोटे-छोटे हैं । उनके ख़ुद के उपन्यास पाँच अध्याय में समाप्त हो जाते हैं। उपन्यास का परिवेश व छत्तीसगढ़ का भौगोलिक क्षेत्र उनका जाना-बूझा है, जहाँ उन्होंने तीस साल बिल्कुल निचले स्तर पर जाकर कार्य किया है। उन्हें उपन्यास पढ़ते समय जुड़ाव महसूस हुआ। उपन्यास में त्रिवेन्द्रम के समुद्री बीच का एक दृश्य है जिसमें महादेव व अल्का के प्रेम का चित्रण किया गया है। यहाँ उनके शिदद्त से प्रेम करने में लेखक को संकोच नहीं करना था। उसे और अच्छे से चित्रित करना था। इसी तरह उपन्यास में आये समलैंगिकता के एपीसोड को चित्रित करना था। आजकल हम साहित्य में स्थानीय बोलियों के प्रयोग को भूलते जा रहे हैं। स्थानीय बोली का तड़का एक दो जगहों पर लगाया जाता तो उपन्यास और मजेदार हो जाता।

उन्होंने आगे कहा कि उपन्यास की विषय वस्तु सुदृढ़ है लेकिन कथात्मकता और कलात्मक पक्ष को और उकेरा जाता तो बेहतर होता। वैसे, कुछ स्थानों पर इसका ध्यान रखा गया है। बड़ी ही खूबसूरती से इसका वर्णन किया गया है जैसे कि भट्टी के मैनेजर कालिका प्रसाद की रोज़ की खुराक का वर्णन या जब सोनी एक अध्याय में कहते हैं कि ’राजनीति रूपी न्यूक्लियस में महादेव रूपी इलेक्ट्रॉन पिछले चार सालों से निचली कक्षा में लगातार बिना किसी परिणाम के चक्कर लगा रहा था उसका एक दम से ऊपरी कक्षा में आरोहण हो गया था, यह महादेव का क्वांटम जंप था।’ तो एकदम से उपन्यास के कलात्मक पक्ष में क्वांटम जंप की अनुभूति होती है। उन्होंने लेखक को इस उपन्यास के लिये बधाई देते हुये भविष्य में और अच्छा उपन्यास रचने के लिये शुभकामनायें दीं।

कार्यक्रम में आईजी मकरंद देऊस्कर, बुंदेलखंड मेडीकल कालेज सागर के डीन डॉक्टर पटेल, साहित्यकार शांतिलाल जैन, मलय जैन, महेश श्रीवास्तव, युगेश शर्मा, घनश्याम सक्सैना, जगदीश किंजल्क व डॉक्टर सीमा सोनी, निधि देउस्कर सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी अधिकारी गण, व साहित्यकार उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन कहानीकार व उपन्यासकार चन्द्रभान राही ने किया व आभार प्रदर्शन श्री जगदीश किंजल्क ने करते हुये हर्ष व्यक्त किया तथा उपस्थित प्रबुद्ध श्रोताओं का धन्यवाद अदा किया कि जंहाँ साहित्यिक कार्यक्रमों में संतोषजनक उपस्थिति एक चुनौती होती है; इस कार्यक्रम में आज भोपाल में दो अन्य बड़े साहित्यिक आयोजन इसी समय होने के उपरांत भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाया। उन्होंने उपन्यासकार सुदर्शन सोनी को बधाई दी।




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