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ISSN 2292-9754

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09.14.2017


साहित्यायन ट्रस्ट का स्थापना दिवस समारोह
डॉ. आरती स्मित

4 सितंबर 2017 साहित्यायन ट्रस्ट द्वारा "दूसरा स्थापना दिवस समारोह" के रूप में मनाया गया । कार्यक्रम का शुभारंभरंभ दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात होनहार युवा रजत पूरी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से! इस अवसर पर ज्ञानपीठ के निदेशक आदरणीय लीलाधर मंडलोई द्वारा प्रस्तुत 'आम नागरिक का दायित्व' विषय पर सारगर्भित व्याख्यान ने एक बार सोचने पर विवश कर दिया। ट्रस्ट के अध्यक्ष ब्रजेंद्र त्रिपाठी द्वारा स्वागत भाषण एवं ट्रस्ट की गतिविधियों की जानकारियाँ प्रस्तुत की गईं। महासचिव आरती स्मित द्वारा 'बाल शिक्षा जागरूकता अभियान' के अंतर्गत आरंभ 'सावित्री बाई फुले पुस्तक योजना' पर प्रकाश डाला गया। संस्थापक सदस्य अर्शदीप सिंह द्वारा ट्रस्ट की गतिविधियों का सार स्लाइड शो के रूप में प्रस्तुत किया गया। 'बाल पुस्तक 'मैं अच्छी हूँ ना!' का लोकार्पण पुस्तक की नायिका आद्रिका उर्फ़ आशी, अनिका, दीक्षा एवं वेदांशी, ट्रस्ट के संरक्षक द्वय डॉ. हरीश नवल एवं डॉ. शिवमंगल सिंह 'मानव' , चित्रकार श्रेया श्रुति एवं डिज़ाइनर अर्शदीप सिंह, प्रोफ़ेसर लल्लन प्रसाद, आरती स्मित, मनाली राज, एवं प्रणीता एवं अन्य गणमान्य व्यक्तित्व ने किया।

इस पुस्तक को विज़ुअल स्वरूप दिया cost n cost की प्रोप्राइटर और संस्थापक सदस्य प्रणीता ने। निर्माण-निर्देशन प्रणीता का, एडिटिंग कार्यकारी सदस्य अजीत कुमार की। नायिका 3 वर्ष से कम उम्र की आद्रिका है, जिसने अपने स्वर और अभिनय से पुस्तक को जीवंत कर दिया। यह वीडियो बेहद पसंद किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत आद्रिका की 'गुरु ब्रह्मा' श्लोक से, फिर ॐ भुर्भूव: ... एवं वंदे मातरम आदि से हुई। नन्ही आद्रिका ने संस्कृत श्लोक एवं गायत्री मंत्र ज़ुबानी सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। 3 वर्षीया अनिका ने भी 'वंदे मातरम' सुनाया। छोटी सी दीक्षा एवं प्यारी वेदांशी ने 'डोला रे' पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया तो कनिका एवं अर्शदीप सिंह ने भांगड़ा नृत्य से लोकरंजन किया। पंकज मलासी ने उपशास्त्रीय नृत्य से दर्शक को भाव विभोर किया। ग़ज़ल गायक मुकेश कुमार सिन्हा के साथ इंद्रीश की तबले पर संगत ने दर्शक श्रोता को ग़ज़ल से रसास्वादन करवाया और कार्यक्रम की संपन्नता यशस्वी रोहित आनंद के बांसुरी वादन से हुई। शीतल स्वर लहरी अपने प्रवाह में समग्र तनाव से मुक्त कर शांत प्रदेश में ले चली थी। आभार व्यक्त करते हुए आरती स्मित ने कहा, "आप अपने हैं, इसलिए आए। अपनों को धन्यवाद नहीं प्रणाम किया जाता है। सभी को साहित्यायन परिवार की ओर से नमन"।


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