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ISSN 2292-9754

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06.15.2017

पुस्तक समीक्षा / चर्चा

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अधबुनी रस्सी : एक परिकथा
अनिल प्रभा कुमार की कहानियाँ
गहन संवेदना की सूक्ष्म-अभिव्यक्ति

अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान की व्यावहारिक परख
अनुभव की सीढ़ी: संवेदना का महाकाव्य
अनूभूतियाँ और विमर्श : विविध सरोकारों के रंगचित्र
अपने समय का चित्र उकेरतीं कविताएँ
अपने समय को परिभाषित करती हुई कहानियाँ

अपने हिस्से के पानी की तलाश
अब फिज़ाओं में महक रही है हिंदी भाषा
अबलाओं का इन्साफ़ - स्फुरना देवी
अभिनव अभिव्यंजनाओं की अभिनव अनुभूतियाँ
अर्थचक्र: सच का आईना
असभ्य नगर (लघुकथा -संग्रह)
अहसास की रोशनी- 'चराग़े‍-दिल'
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"आँख ये धन्य है"जो सपनों को साकार होते देख रही है
आँखन देखी : डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल
आँगन की धूप कविता की वापसी है - डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय साहित्येन्दु

आत्मस्वीकृति
आदिवासी और दलित विमर्श : दो शोधपूर्ण कृतियाँ
आधी आबादी का संघर्ष
आधी दुनिया की पीड़ा
आधुनिक भारत में जाति
आने वाला समय हिंदी का है

आलोचना : सतरंगे स्वप्नों के शिखर
आशा बर्मन की प्रथम पुस्तक "कही-अनकही" के संदर्भ में
अवाम की आवाज़

आरंम्भिक भारत का संक्षिप्त इतिहास
आस्थाओं की व्यापकता व अनुभवों की गहराई से उजला "सूरज मेरा दुश्मन"
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इक उम्मीद से दिल बहलता रहा इतिहास गौरव शेरशाह सूरी: शाने-तारीख़  
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उकाल-उन्दार
"उकाल-उन्दार" :  कवि पाराशर गौ उत्तर आधुनिकता, साहित्य और मीडिया पर एक उपयोगी पुस्तक
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एक कहानी यह भी    
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कबीरदास की कविता एवं संवाद
शारदा शुक्ला की "कलम की कॉकटेल": एक समीक्षा
कवि महेंद्रभटनागर-विरचित राग-संवेदन निराशा और बुद्धिवाद के समानांतर एक रागमय संसार की रचना
कविता के पक्ष में प्रबल दावेदारी
कविता में कवि नरेंद्र मोदी का रचनात्मक सफ़र
कहानी और लघुकथा का संकलनः पराया देश
"कही-अनकही" पुस्तक समीक्षा
किराये का नरक - एक यात्रा
कविता की जातीयता
क्या तुमको भी ऐसा लगा ?
क्या तुमको भी ऐसा लगा : समालोचना
क्या मैंने इस सफेदी की कामना की थी? : द्रौपदी का आत्म साक्षात्कार
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मण्डल के उपाध्यक्ष : प्रेमचंद साहित्य के समर्पित आचार्य डॉ. कमल किशोर गोयनका
"क्योंकि ...औरत ने प्यार किया"
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क्ष    
     
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खामोश खंडहरो की अकथनीय दास्तान - नारी की त्रासदी    
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"ग़ज़ल कहता हूँ" - कुछ विचार
गलियारे
गवेषणात्मक एवं विश्लेषणात्मक प्रतिभा की पहचान : हिन्दी कहानी कोश
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घर एक यात्रा है - वरिष्ठ कवि-आलोचक श्रीनिवास श्रीकांत का नया काव्य संग्रह    
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चराग़े-दिल - कुछ विचार
चश्मे अपने-अपने एक नज़र
चाँद मुट्ठी में कर ले
चाहती हूँ मैं, नगाड़े की तरह बजें मेरे शब्
चिर इच्छा को समर्पित कविताएँ
चूड़ी बाज़ार में लड़की
"चूड़ीवाला और अन्य कहानियाँ" उत्तरी अमेरिका के गद्य लेखन की नई किरण
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जमीन से उखड़े लोगों के की कहानियाँ जहाँ साँसों में बसता है सिनेमा
ज़िंदगी की आँच में तपे हुए मन की अभिव्यक्ति
जीवन की ऊष्मा से भरी कविताएँ
जीवन के कैनवास पर अनुभवों के गहरे रंग भरती स्वर्ण सीपियाँ
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ज्ञ    
     
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झकझोरने वाली कहानियाँ    
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ताज़ी बयार चली तो है.
तुर्रम (बाल उपन्यास)
   
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त्र    
     
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दक्षिण भारत के हिंदी शोध की बानगी : संकल्पना
दिवा स्वप्न
दोहरे चरित्र को बेनक़ाब करती कविताएँ -आखिर क्या हुआ?  
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नई रोसनी: न्याय के लिए लामबंदी
नई सहस्त्राब्दी में 'रजतजयन्ती'
की कहानियों की यात्रा से
गुज़रते हुए
नई सुबह - समीक्षा
नक्सलबाड़ी की चिंगारी

नवजागरण के परिप्रेक्ष्य में रवीन्द्रनाथ ठाकुर का कालजयी उपन्यास "गोरा"
"नहर में बहती लाशें"
नारी अस्मिताओं को तलाश करती "चूड़ी बाज़ार में लड़की"
निष्ठावान सृजन साधना की उपज : नागफनी के फूल
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पंद्रह सिंधी कहानियाँ
पिघलती शिला
पुस्तक विचार /तब्सेरा - "धड़कनें"
प्रकृति चित्रण का द्रष्टव्य काव्य संकलन सिमट रही संध्या की लाली
प्रतिक्रिया - "चन्दन-पानी"
प्रतिबद्धताओं से मुक्त कहानियों का स्पेस
प्रथम दृष्टया (मन की पीर)
प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियाँ
"प्रवासिनी के बोल"
प्रिय राम.......
प्रेमचंद की कथा परंपरा में पगी कहानियाँ
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"फरिश्ते निकले" - नारी शोषण का वीभत्स आख्यान
फाइटर की डायरी : मैत्रेयी पुष्पा "फ़ैसला सुरक्षित है" - एक परिच
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बदलती सोच के नये अर्थ - समीक्षा
बारहमासा (हाइकु संग्रह) : उच्च सौंदर्य-बोध की प्रस्तुति 
बालिका शिक्षा
बेशर्म के फूल
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भारत में विकेंद्रीयकरण के मायने
भीगे पंख - एक समीक्षा
भारतीय मुस्लिम परिवार में जन्मी स्त्री के शोषण और संघर्ष की आत्मकथा : "दर्द जो सहा मैंने"  
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मदिरालय - हालावाद पर प्रहार
मध्यवर्गीय पारिवारिक मान्यताओं पर खुलती  "खिड़की"
मनुष्य और प्रकृति के अन्योन्याश्रित प्रसंगों की त्रासदिक गाथा - हिडम्ब

मरुभूमि के कठिन संघर्षों की दास्तान "शौर्य पथ"
महापुरुष की महागाथाषा
महीन सामाजिक छिद्रों को उघाड़ती कहानियाँ
''माँ पर नहीं लिख सकता कविता''
मानव जीवन के विशिष्ट क्षणों का दर्शन कराता कहानी संग्रह "कुछ भूली-बिसरी यादें"
मानस मंथन एक मार्मिक अभिव्यक्ति
"मानिला की योगिनी" - एक समीक्षा
मिट्टी का साहित्य : लव कुमार लव
मीडिया के बदलते रूपों की बानगी
मृग तृष्णा

मेरे मन में लिखा पढ़ो तुम भी...
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यथार्थ बुनती कहानियाँ
यदि कोई पूछे तो ......
यहाँ दर्द की नदी बहती है
"यादों की लकीरें": संस्मरण विधा में एक नए युग की शुरूआत
यार जुलाहे संवेदना और जीवन आनंद
ये गीत परिवेशगत आस्था एवं दायित्वबोधी संवेदना से संपृक्त हैं
ये घर तुम्हारा है (कविता संग्रह) - एक परिचय
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रबाब : कवि जसबीर कालरवि
रामकिशोर उपाध्याय की काव्यकृति "दीवार में आले"
राग-विराग में नारी चित्रण
रायगाँ नहीं हूँ मैं -- एक नज़र
रिश्तों की पगडंडियाँ
रस झरता "बूँद-बूँद आकाश"
रूपसिंह चन्देल के उपन्यास गलियारे पर इला प्रसाद
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लाश एवं अन्य कहानियाँ
लोकजीवन की शक्ति से जुड़े सामर्थ्यवान व्यंग्यकार अशोक परूथी "मतवाला"
लौ दर्दे-दिल की (ग़ज़ल संग्रह) - देवी नागरानी  
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वंचित संवेदना के साहित्य पर ग्रंथ-त्रयी
वक़्त की शिला पर वह लिखता एक जुदा इतिहास
वर्तमान सम्बन्धों के विघटन का जीवंत
वर्ष 2003 - ब्रिटेन के हिन्दी लेखकों की महत्त्वपूर्ण कृतियाँ
वृद्धावस्था
वहाँ पानी नहीं है : सदी के सत्य को सामने लाने वाली कविताएँ
व्यंग्य नव लेखन में ऊँचे दर्जे का अधिकार : शिकारी का अधिकार
व्यवस्था को झकझोरने का प्रयास: गधे ने जब मुँह खोला
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श-ष    
शव काटने वाला आदमी
शोषित नारी की कथाएँ
   
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श्र-शृ    
     
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संघर्षरत चेतना और विद्रोह का कवि सुशील कुमार शैली
संवेदनाओं के स्वर: एक परिचय
"संवेदनाओं के स्वर" एक मूल्यांकन
सच क्या था - एक सार्थक कृति
सदियों से अनसुनी आवाज़ - दस द्वारे का पींजरा
सपने लंपटतंत्र के
समाज भाषा विज्ञान /रंग शब्दावली : निराला काव्य
समकालीन कथा साहित्य में सम्बन्धों की त्रासदी का चरम आख्यान
समय की धार पर अकुलाए शब्द
सरोकारों को उजागर करती कहानियाँ
"साँसों की सरगम" : एक सुंदर हाइकु-संग्रह
साक्षी है पीपल
साझी उड़ान- उग्रनारीवाद नहीं समन्वयकारी सह-अस्तित्व की बात
साहित्यिक समाज की दशा, दिशा और चुनौतियाँ : ज़माने में हम
सैर "कथाकारों की दुनिया" की
स्त्री जीवन के भोगे हुए यथार्थ की कहानी : 'नदी'
"स्थानीयता" और "वैश्विकता" के बीच सार्थक आवाजाही
स्वयं से संघर्ष करती कहानियां: "स्वयं के घेरे"
स्वर्ण आभा गुजरात एक अदभुत भागीरथ कार्य
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हथेलियों में सूरज
हिन्दी बाल साहित्य और बलराम अग्रवाल के बाल एकांकी हिंदी भाषा के बढ़ते कदम
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ऋषभदेव शर्मा का कवि-कर्म :
धूप ने कविता लिखी है गुनगुनाने के लिए
   
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