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ISSN 2292-9754

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01.23.2019


चिंता का विषय - सम्मान और उपाधियाँ
डॉ. पुष्पलता भट्ट

नमस्कार।

सम्मान पाना या देना सचमुच गौरव का विषय है। परन्तुजब सम्मान आदान-प्रदान की वस्तु बन जाएँ और उनकी बन्दर-बाँट होने लगे तो निश्चय ही यह चिन्ता का विषय बन जाता है। यह हिन्दी साहित्य का संक्रान्ति काल है। साहित्यकारों और शिक्षाविदों की इसी भीड़ में से एक दिन कोई सूर्य की भाँति चमक कर हिन्दी भाषा और साहित्य को उसकी ऊँचाई तक ज़रूर पहुँचाएगा।

डॉ. पुष्पलता भट्ट
नोएडा
pushplatabhatt@gmail.com


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