अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.23.2019


चिंता का विषय - सम्मान और उपाधियाँ
अमिताभ वर्मा

आदरणीय घई साहब,

सम्पादकीय में आपने सम्मान तथा उपाधियाँ ख़रीदने पर वितृष्णा व्यक्त की है। मैं आपके विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। मेरे एक निकट सम्बन्धी ने पैंतीस-चालीस वर्ष पहले जैसे-तैसे स्नातक स्तर की पढ़ाई करने के बाद किताबों का मुँह तक नहीं देखा। कुछ वर्ष पहले उन्होंने एक जाली विश्वविद्यालय को पैसे दे कर अपने नाम के पहले ’डॉक्टर’ लगवा लिया, और अब हर जगह ’डॉक्टर’ कहला रहे हैं। मज़ाल है कि कोई पूछ दे, ’’प्रभु, आपने बी.ए. के बाद की पढ़ाई कब की और आपकी थीसिस जादू के किस पिटारे में बन्द है?’’ वैसे, बिहार के एक पूर्व मुख्यमन्त्री ने तो किसी होनहार की थीसिस ले कर स्वयं ’डॉक्टर’ की उपाधि प्राप्त कर ली थी। पहले दूसरे की थीसिस हथिया कर डॉक्टरेट की जाती थी, अब थीसिस की भी आवश्यकता नहीं रही-शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रगति विलक्षण है!

भवदीय,
अमिताभ वर्मा
amitabh.varma@gmail.com


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें