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09.24.2007
 
कल गए थे जिसे बीमार-ए-हिज्रां छोड़ कर
’ज़ौक़’ मोहम्मद इब्राहिम

 

कल गए थे जिसे बीमार-ए-हिज्रां छोड़ कर
चल बसा वो आज सब हस्ती का समां छोड़ कर

बीमार-ए-हिज्रां=विरह का रोगी

तिफ़्ल-ए-अश्क ऐसा गिरा दामन-ए-मिज़्शगां छोड़ कर
फिर न उठा कूचा-ए-चाक-ए-गरेबां छोड़ कर

तिफ़्ल-ए-अश्क=बच्चों जैसे आँसू; मिज़्शगां=पलकें
सर्द-मेहरी से किसी की आग से दिल सर्द है

याँ से हट जा धूप ऐ अब्र-ए-बहारां छोड़ कर

सर्द-मेहरी=उदासी; अब्र-ए-बहारां=वसन्त के बादल

गर ख़ुदा देवे क़नअत माह-ए-यक-हफ़्ता की तरह
दौड़े सारी को कभी आधी न इन्सां छोड़ कर

माह-ए-यक-हफ़्ता=आठवीं का चाँद



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