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09.24.2007
 

ख़ामोशी ख़ुद अपनी सदा हो ऐसा भी हो सकता है

ज़का सिद्दीक़ी

 

ख़ामोशी ख़ुद अपनी सदा हो ऐसा भी हो सकता है
सन्नटा ही गूँज रहा हो ऐसा भी हो सकता है

 

मेरा माज़ी मुझ से बिछड़ कर क्या जाने किस हाल में है
मेरी तरह वो भी तन्हा हो ऐसा भी हो सकता है

 

सहरा सहरा कब तक मैं ढूँढूँ उल्फ़त का एक आलम
आलम आलम इक सहरा हो ऐसा भी हो सकता है

 

अह्ल-ए-तूफां सोच रहे हैं साहिल डूबा जाता है
ख़ुद उनका दिल डूब रहा हो ऐसा भी हो सकता है

 



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