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ISSN 2292-9754

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01.26.2019


गणतंत्र

इतिहास राजतंत्र का
परिवेश गणतंत्र का
बदलाव है परिवेश में
परिवेश ही आरम्भ है।

परिवेश राष्ट्रवाद का
आवेश है विकास का
कुरीतियों के नाश का
अवसाद किस बात का?

प्रसारित कुरीतियाँ
अवतरित है नीतियाँ 
नीतियों से आस है 
आस का आवास है।

निर्धनता का नाश हो 
अभिजात्य का विनाश हो
विषमता का प्रवास हो
समानता का वास हो।

एकजुटता के रंग में
तिरंगा हो संग में 
बन्धुत्व की बयार हो  
ख़ुशियाँ अपार हों।


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