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ISSN 2292-9754

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11.03.2017


राधे ने जब

राधे ने जब
बाबा की जेल का
चक्कर लगाया!
तो आशा पर
पानी फिरते देख
बापू चकराया!

बोले ....
राधे! तुम माँ की तरह
बेशक़ बाबा पर
ममता लुटाओ!
पर मैं उसका भी बाप हूँ
और तुम माँ हो
इस नाते कुछ तो प्रेम
मुझमें लुटाओ!

वो बोली...
जाने कौन से मुहुर्त में
पुलिस ने तुम्हें धरा है!
अपने ही लोगो से
तुमने अब तक जेल भरा है!
भगवान के लिए
मुझ पर रहम खाइये!
अपनी पटरानी होने से
आप ही मुझे बचाइये!
पटरानी बनकर
ना मैं जवां और ना माँ
रह पाऊँगी!
क़ानूनी लड़ाई लड़ते-लड़ते
आपकी तरह जेल में
सड़ जाउंगी!


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