विजय विक्रान्त

कविता
ओ भारत देश महान मेरे
झांसी की रानी लक्ष्मी बाई
यह जीभ
यह पल भी यूँ ही गुज़र जायेगा
वर्ष 2005 की मंगल कामनाएँ
होली का हुड़दंग
आपबीती
लोक कथा
17 हाथी
99 का चक्कर
अपना हाथ जगन्नाथ
अपने अपने करम
कन्हैया की हाज़िर जवाबी
कठपुतली का नाच
कभी किसी को कमज़ोर मत समझो
चतुर राज ज्योतिषी
छोटा नहीं है कोई
जैसी तुम्हारी इच्छा
टेढ़ी खीर
तीन पुतले
तुम अपना दण्ड स्वयं चुन लो
तेरी दुनिया बहुत निराली है
पहले मैं तो छोड़ के देखूँ
बापू उसे मत फेंकना तुम्हारे काम आएगा
भाग्य का लिखा टल नहीं सकता
मेहनत की कमाई
लक्ष्मी का आवास और प्रवास
सोने की चमक
हथेली पर बाल
हर काम अच्छे के लिये होता है
आलेख
एक ख़त ख़ुदा के नाम
स्वामी विवेकानन्द के अनमोल वचन