अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
05.05.2018


इस पल है जीवन

जन्म हुआ था मेरा
उन पत्तियों के हरित धरातल पर
एक लचीली ख़ूबसूरत डाल पर
हवाओं की ख़ुशबू से सराबोर
सूरज की चमक समेटे हुए
बूँद ही सही,भरपूर था जीवन।

जन्म हुआ था मेरा
मासूमियत के होंठों पर
गर्द की पर्तों के पीछे से
कठिनाइयों के पहाड़ों को चीर
उम्मीदों का सूर्य निकला हो जैसे
इक हँसी ही सही, बिंदास था जीवन।

जन्म हुआ था मेरा
आशाओं की तुलसी के नीचे
अमरत्व की पताका लिए
तिमिर के चक्रव्यूह से जूझते हुए
ऊर्जा के अंकुर बिखरने
लौ बन दीये की ज्वलंत था जीवन

जन्म हुआ था मेरा हर पल
पिछले हर पल के मर मिटने पर
लहर- लहर मिल कर सागर सा अनंत,
सुंदर, निर्मल, कर्मठ, आनंदित,
भरपूर, बिंदास, ज्वलंत, शाश्वत
जो मेरा अभी, इस पल है जीवन।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें