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ISSN 2292-9754

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07.08.2016


तरुणाई को चुप कराना चाहता है

तरुणाई को चुप कराना चाहता है।
इसलिए माफ़िक बहाना चाहता है॥

साथ अपने कर लिए उसने लफंगे।
और अब ताक़त दिखाना चाहता है॥

गालियों वाली बना ली फौज है जो।
गोलियों वाली बनाना चाहता है॥

हम अमन के गीत गाते हैं मगर वो।
नफ़रतों वाला तराना चाहता है॥

पाक दामन जो रहे नायक हमारे।
दाग़ दामन में लगाना चाहता है॥

वह रहे वाचाल बाकी बेज़ुबां हों।
जाने वह कैसा ज़माना चाहता है॥

अब अँधेरा हो चला बेहद घना है।
'सिद्ध' इक दीपक जलाना चाहता है॥


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