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ISSN 2292-9754

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07.08.2016


अर्क पिया सूरज का यारा

सदियों की तंद्रा टूटेगी, जोश दिलों में भर डालेंगे।
सालों साल गए जो कुचले, वे ही आज असर डालेंगे॥

तुम उनकी ताक़त देखोगे, काँपेगी गर्जन से धरती।
काँप उठेंगे तारे, जब ये, नज़र आसमां पर डालेंगे॥

अब हैं साथ उजाले चलते, अर्क पिया सूरज का यारा।
तरफ़दार तुम तम के हो गर, राख तुम्हें ये कर डालेंगे॥

बहुत सितम सह देखे खल के, सहना और नहीं थोड़ा भी।
खल का खरल छीन, खल का ही, धुन मूसल से सर डालेंगे॥

घात लगाए हैं दो-पाए, चूके ज़रा, सभी चट करते।
रही बिजूकों की रखवाली, खेत हमारा चर डालेंगे॥

मेरे गाँव-गली के साथी, अब तो जाग गए हैं 'सिद्ध'।
कितने ख़ौफ़ बिखेरेगा खल, झोंक आग में डर डालेंगे॥


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