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ISSN 2292-9754

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12.30.2015


ग़म खा - ख़ूब गा...!!

कड़की के दिनों में मिठाई खाने की तीव्र इच्छा होने पर मैं चाय की फीकी चुस्कियाँ लेते हुए मिठाई की ओर निहारता रहता हूँ। इससे मुझे लगता है मानो मेरे गले के नीचे चाय के घूँट नहीं बल्कि तर मिठाई उतर रही है। धन्ना सेठों के भोज में जीमने से ज़्यादा आनंद बतकही में व्यंजनों के विश्लेषण से प्राप्त किया जा सकता है। क्योंकि हमें पता होना चाहिए कि ख़ुश रहना या दुखी होना अपने हाथ में है। आदमी टूटी झोंपड़ी में रहते हुए भी महलों का अहसास करता रह सकता है। लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि सब ऐसे नहीं होते। ज़्यादातर किसी न किसी बात पर कुढ़ते रह कर अपना और दूसरों का भी ब्लड प्रेशर बढ़ाते रहते हैं।

अब हाल के घटनाक्रम को ही ले लीजिए। कालचक्र ने हाल के दिनों में देशवासियों को ख़ुश होने के कई मौके दिए। एक पखवाड़े के भीतर अनेक राजनेताओं के बाल-बच्चों का घर बस गया। एक ख़बर के मुताबिक़ देश के एक नामी बुद्धिजीवी हर महीने आम-आदमी को मिलने वाली तनख़्वाह के बराबर की कीमत की किताबें खरीद कर पढ़ जाते हैं और अपना बुद्धिबल बढ़ाते रहते हैं।

जेल में बंद एक नायक के बारे में ख़बर आई कि उनकी सज़ा की मियाद करीब छह महीने कम हो गई है और समय से काफी पहले ही वे जेल से रिहा हो सकते हैं। यानी उनके प्रशंसक जल्द ही उन्हें एक बार फिर से रुपहले पर्दे पर अन्याय-अत्याचार के ख़िलाफ़ संघर्ष करते हुए देख सकेंगे। दाल व सब्जियों समेत दूसरी ज़रूरी चीज़ों की क़ीमतें बढ़ने से परेशान आम आदमी के लिए ऐसी ख़बरें ज़रूर तपती दुपहरी में ठंडी हवा के झोंके समान है। लेकिन ठहरिए देशवासियों के लिए सुसंवाद का यह सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं। समय के पिटारे में अभी बहुत कुछ शेष है।

दूसरे नायक के बारे में पता लगा कि वे जेल जाते-जाते बाल-बाल बच गए। कहा जाता है कि जेल जाने से बचने का अहसास होते ही बेचारे की आँखों में आँसू आ गए। उन आँसुओं का विश्लेषण भी ख़ूब हुआ। नायक के आँसू पूरे दिन सुर्ख़ियाँ बनी रही। अदालती चक्कर के एक-एक दिन का हिसाब परोसा गया। ढोल-नगाड़े बजाते हुए नाचते-कूदते प्रशंसकों का ऐसा उत्साह बस क्रिकेट में मिली सफलता के बाद ही देखने को मिलता है। उस दिन मैं जब भी चैनल खोलता, बस एक ही ख़बर...। देखिए फलां के आँसू ...। बेचारा कैसे रो रहा है। कोई कह रहा है फलां के बेकसूर साबित होने से सबसे ज़्यादा ख़ुश मैं हूँ... किसी ने सलाह दी...। ...भले ही उनकी उम्र 50 की हो गई है, लेकिन अब उसे शादी कर लेनी चाहिए। विश्लेषण शुरू हुआ तो पूर्वानुमान में अनेक अभिनेत्रियों की सूची तैयार हो गई, जिसे भविष्य में नायक की अर्द्धागिनी बनने का सौभाग्य मिल सकता है।

एक और सुसंवाद ...। गुज़रे ज़माने के क्रिकेटर ने ऐलान किया कि उनके सपूतों ने यदि बड़ा होकर उनकी तरह तिहरा शतक लगाया तो वे उन्हें विदेशी फेरारी कार गिफ़्ट करेंगे। यह भी एक सुसंवाद ही तो रहा। एक और क्रिकेटर के बारे में मालूम हुआ कि उसकी मंगनी पर देश के एक नामी उद्योगपति ने विशाल और भव्य भोज का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में नामी-गिरामी क्रिकेटर अपनी - अपनी पत्नियों, मंगेतरों व गर्ल फ्रेंडों के साथ मौजूद रहे। इस बीच बुलेट ट्रेन का सपना एक बार फिर साकार होता नज़र आया। इस परिस्थिति में हम जैसे आम-आदमी को ग़म खाते हुए ख़ूब गाते रहने का अभ्यास ज़ारी रखना चाहिए।


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