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ISSN 2292-9754

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10.06.2014


उन दिनों ये शहर...

उन दिनों ये शहर बेतरतीब हुआ करता था
मगर दिल के बहुत, करीब हुआ करता था

यूँ लगता था, तुझे छू के बस आई हो हवा
मेरे बियाबान का ये नसीब हुआ करता था

छीन कर मेरी परछाई, मुझसे बिछड़ने वाले
‘तमस’, तेरे वजूद का रक़ीब हुआ करता था

मेरे माँगने से वो मुझको देता भी क्या
मेरा ख़ुदा, मेरी तरह, ग़रीब हुआ करता था


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