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ISSN 2292-9754

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04.13.2017


अपनी सरकार

हाथों में दम-पतवार है साथी
माझी की कब दरकार है साथी

बस एक बिगुल से दौड़े तुम चलना
सीमा की सुनो पुकार है साथी

छलनी-छलनी कश्मीर का सीना
घायल- मज़हब, व्यवहार है साथी

है अपनी जमा पूँजी बस इतनी
साबुत साँझी-दीवार है साथी

उनसे मेरी अब निभेगी कैसे
मेरी-उनकी तकरार है साथी

हाशिये में बहुत आम हैं ख़बरें
सफ़ा-सफ़ा तो इश्तिहार है साथी

बैद- हकीम बैगा-गुनिया देखे
मुल्क अब तलक बीमार है साथी

देशद्रोह का इल्ज़ाम है उनपर
मासूम कहीं गिरफ़्तार है साथी

राम-राज लाने विदेश निकलती
अजीब अपनी सरकार है साथी


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