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ISSN 2292-9754

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11.05.2017


ताँका

1.
निज शक्ति का
हनुमत को जब
हुआ आभास
पल में लाँघ लिया
निस्सीम पारावार ।

2.
प्रकृति सदा
निरत रहती है
निज कार्यों में
मनुज होकर तू
व्यर्थ वक़्त बिताये।

3.
पथ बाधा से
विचलित होकर
जीवन व्यर्थ
सच्चा मनुज वही
जो करता संघर्ष।


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