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ISSN 2292-9754

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07.02.2014


शुभचिंतन

गुणों को सींचो
ना बुराइओं को खींचो
मुस्कुराना सहज है
न दांतों को भींचो।

व्यर्थ संकल्प है खरपतवार
जीना कर देते दुष्वार
रहते सदा झुंझलाये से
आहें भर कर जीवन जीते।

बीती पर लगाओ विराम
तभी मिलेगा चित को आराम
बदला नहीं बदलना सीखो
जीना हो जायेगा आसान।

मिलो सभी से मुस्कुरा कर
अपना हो या हो वह पराया
शुभचिंतन ले आयेगा
सबके जीवन में नया उजाला।

श्रेष्ठ संकल्प उच्च विचार
यही है सुख शांति के आधार
इनको जीवन में अपना लो
अपना जीवन स्वर्ग बना लो।


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