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ISSN 2292-9754

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08.27.2016

जुदाई
श्यामल सुमन

गीत जिनके प्यार का भर ज़िन्दगी गाता रहा।
बेरुख़ी से कह दिया अब न कोई नाता रहा॥

हर जुदाई और मिलन में थीं आँखें आपकी।
क्या ख़ता ऐसी हुई यह सोच घबराता रहा॥

जो थी चाहत आपकी मेरी इबादत बन गयी।
हर इशारा आपका मुझको सदा भाता रहा॥

भूल ख़ुद की भूल से गर आइने में देखते।
पल न ये आत कभी यूँ ख़ुद को समझाता रहा॥

आपको अमृत मिले पिया ज़हर हूँ इसलिए।
कितने अवसर अब तलक आता रहा जाता रहा॥

लुट गयी ख़ुशबू सुमन कि जब जुदाई सामने।
बात ख़ुशियों की करें क्या ग़म पे ग़म खाता रहा॥
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