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08.28.2016


जिसकी है नमकीन ज़िन्दगी

जो दिखती रंगीन ज़िन्दगी
वो सच में है दीन ज़िन्दगी

बचपन, यौवन और बुढ़ापा
होती सबकी तीन ज़िन्दगी

यौवन मीठा बोल सके तो
नहीं बुढ़ापा हीन ज़िन्दगी

जीते जो उलझन से लड़ के
उसकी है तल्लीन ज़िन्दगी

वही छिड़कते नमक जले पर
जिसकी है नमकीन ज़िन्दगी

दिल से हाथ मिले आपस में
होगी क्यों ग़मगीन ज़िन्दगी

जो करता है प्यार सुमन से
वो जीता शौकीन ज़िन्दगी


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