अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
01.16.2018


प्यार

“प्यार में सब कुछ बर्बाद हो जाता है, प्यार करना ही नहीं चाहिए, लाइफ ही बेकार हो जाती है,” नमन ने मीना को देखकर कहा।

मीना ने चुपचाप ट्रे उठायी और रसोईघर में चली गयी। ये कोई आज की बात नहीं थी जो मीना रोती या कुछ रियेक्ट करती। प्यार तो मीना ने भी किया है नमन से, मगर मीना ऐसा नहीं सोचती थी| उसे भरोसा था कि उसका प्यार कभी नमन को हारने नहीं देगा।

इस बात को अभी तीन दिन ही बीते थे कि नमन को एक लेटर मिला। नमन बहुत ख़ुश था उसने मीना को ख़ुशी से उठा लिया और बोला, “देखा माँ की दुआ पूरी हो गयी। पापा का सपना सच हो गया आज मैं बहुत ख़ुश हूँ। तीन दिन बाद जॉइनिंग है मीना, दादी का आशीर्वाद है ये उन्होंने इस बार कहा था कि तुझे नौकरी ज़रूर मिलेगी।“

मीना भी नमन के लिए शॉपिंग लिस्ट बनाने लगी उसकी ज़रूरत का सब समान लगाया उसे पता भी नहीं चला कि तीन दिन कब बीत गए आज नमन को निकलना था।

मीना नमन के साथ स्टेशन तक गयी। नमन ट्रेन में बैठ गया मीना ने भारी आँखों से नमन को देखा। अभी नमन और मीना की शादी नहीं हुई थी फिर भी दोनों का रिश्ता ऐसा था जैसे सालों से पति और पत्नी हों।

ट्रेन चली गयी मीना खड़ी रही नमन का कॉल आया मीना को लगा शायद अब नमन उसके लिए कुछ कहेंगे, मीना ने आँसू पोंछ के कॉल रिसीव किया। “मीना मैं तो भूल ही गया तुम अब अकेले क्या करोगी यहाँ, ऐसा करो अपने घर चली जाओ। अब वहीं तैयारी करना। कोचिंग तो वैसे भी अब पूरी हो चुकी है।”

मीना ने स्टेशन से बाहर आके ऑटो किया। और ख़ुद से कहा नमन कोचिंग तो 1 साल पहले ही ख़त्म हो चुकी थी। उसे याद आया कि 1 साल पहले जब वो हार चुकी थी कि अब शायद ही उसे सरकारी नौकरी मिल पाये तो वो अपना रूम छोड़कर नमन के साथ शिफ़्ट हो गयी। उसने नमन के साथ मिलकर फ़ैसला किया कि अब वो नमन की जॉब के लिए जी जान लगा देगी। और एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ा लेगी। तब से नमन ने शायद एक गिलास पानी भी ले कर पिया हो, सुबह उठने से शाम तक मीना ने नमन के पीछे लगा दिए। आज उसे माँ की दुआ, दादी के आशीर्वाद से नौकरी मिल ही गयी। प्यार से उसकी ज़िंदगी बर्बाद हो गयी थी।

ऑटो से उतर कर मीना का शरीर कमरे तक पहुँच गया। आज उसे पहली बार नमन की बात सच मालूम हुई प्यार में ज़िंदगी बर्बाद हुई! मगर किसकी?


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें