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ISSN 2292-9754

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03.22.2016


झूठे अभिनय में बेहुनर हूँ मैं

झूठे अभिनय में बेहुनर हूँ मैं।
इसिलिये तो बेअसर हूँ मैं।

लोग करते हैं जहाँ क़त्लो फ़रेब।
ऐसी दुनियाँ से बेख़बर हूँ मैं।

सत्यता की नुकीली राहों पर।
आज अपना ही हमसफ़र हूँ मैं।

आपकी दिलफ़रेब नज़रोँ में।
कितनी मुद्दत से बेनज़र हूँ मैं।

आज की चालबाज़ दुनियाँ में।
कैसे कह दूँ कि कारगर हूँ मैं।

जिस्त की पोल खुली है जब से।
मौत पाने को बेसबर हूँ मैं।

ढोंगियों की हसीन महफ़िल मेँ।
मानता हूँ कि बेक़दर हूँ मैं।


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