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ISSN 2292-9754

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03.22.2016


जान से ज़्यादा प्यारी यादें

जान से ज़्यादा प्यारी यादें।
मुझको लगीं तुम्हारी यादें।

आँखों की दुल्हन बन बैठीँ।
ज़ालिम तेरी कुँवारी यादें।

दिल में घात लगा कर आईँ।
धोखेबाज़ शिकारी यादें।

सपनोँ की बस्ती में हैं ये।
करती कारगु्ज़ारी यादें।

अल्लाह जाने कब सुधरेगीं।
मुँह से लगी दुलारी यादें।

मुम्बईया छोरी पर अटकीं।
देखो मेरी बिहारी यादें।

'शिव' के दिल पे माथ टिका के।
रोती रहीं बेचारी यादें।


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