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ISSN 2292-9754

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12.31.2015


इंसानियत की मेरी बीमारी नहीं जाती

इंसानियत की मेरी बीमारी नहीं जाती।
सिर से मेरी अना ये उतारी नहीं जाती।

है वास्ता हमारा भी रघुकुल से दोस्तो,
खाली कभी ज़ुबान हमारी नहीं जाती।

मजबूरियाँ ले जाती हैँ बाज़ार में उसको,
इज़्ज़त गँवाने ख़ुद ही बेचारी नहीं जाती।

राहोँ मे लड़कियोँ को सदा घूरने वाली,
आदत हरामज़ादे तुम्हारी नहीं जाती।

शादी किये बिना ही है होती सुहागरात,
लड़की कोई ससुराल कुँवारी नहीं जाती।

कैसे गुज़ार देते हैँ कोठों पे लोग उम्र,
होटल में मुझसे रात गुज़ारी नहीं जाती।

नाहक़ किसी ग़रीब की क़िस्मत बिगाड़ कर,
क़िस्मत मेरी ये मुझसे सँवारी नहीं जाती।


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