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ISSN 2292-9754

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03.05.2016


देखो मेरा वक़्त ये

देखो मेरा वक़्त ये बेहतर बदला है।
इक लड़की की शक्ल में गौहर बदला है।

आई है वो छुप के मुझसे मिलने को।
मेरा भी क्या ख़ूब मुक़द्दर बदला है।

कर लीं सभी क़ुबूल दुआयें हैं मेरी।
कितने दिन के बाद ये पत्थर बदला है।

मौसम भी न रंग बदलते होंगे यूँ।
जिस तरह वो आज सितमगर बदला है।

जब से उसका यार हुआ है दिल छोटा।
आँखों के आँसू में समन्दर बदला है।

वो हरदम इल्ज़ाम लगाता है मुझ पर।
जिसने ख़ुद सौ बार करेक्टर बदला है।

ना ही वो प्रभु राम रहे ना वो सीता।
कलयुग ने इस तरह स्वयंवर बदला है।


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