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ISSN 2292-9754

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12.31.2015


आपके दर पर दिवाना आ गया

आपके दर पर दिवाना आ गया।
प्यार करने का ज़माना आ गया।

महफ़िलोँ मे छा गईँ रंगिनियाँ,
प्यार का मौसम पुराना आ गया।

आपकी मदहोश आँख़ें देख कर,
यूँ लगा मेरा ठिकाना आ गया।

सह सकूँगा आप से मैं दूरियाँ,
प्यार में ख़ुद को सताना आ गया।

हुस्न वालोँ की ही मानिन्द आपको,
तीर नज़रोँ का चलाना आ गया।

आपकी यादों मे तनहाँ बैठकर,
मुझको भी आँसू बहाना आ गया।


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