अन्तरजाल पर साहित्य प्रेमियों की विश्राम स्थली
ISSN 2292-9754

मुख पृष्ठ
02.27.2016


होता जो हनीमून नेपाल में

हनीमून से मेरा परिचय उस समय ही हो गया था जब मेरी उम्र लगभग तीन या चार वर्ष की रही होगी। बात यूँ हु़ई कि मेरे चाचा जी की शादी हु़ई थी और वे हनीमून के लिये कश्मीर जा रहे थे। उन दिनों कश्मीर हनीमून मनाने तथा फ़िल्मों की शूटिंग के काम आता था, आजकल आतंकवादियों की शूटिंग के काम आता है। अब चूँकि मेरे चाचा जी मुझे उतना ही प्यार करते थे जितना चाचा नेहरू अपने जन्म दिवस पर मैले-कुचैले, नंग-धड़ंग उन बच्चों को गोद में उठा कर किया करते थे जिनको गाँव की पाठशाला में पेड़, की एक टहनी के ज़ोर पर मार-मार कर यह सिखाया जाता था कि बच्चों! यदि तुम इन्साफ़, की डगर पर चल कर दिखाओगे, तो तुम कल के नेता बन जाओगे और यह देश तुम्हारा हो जायेगा। उनमें से कई बच्चे तो आज के नेता बन भी गये है और इंसाफ की डगर छोड़ कर किसी और डगर पर चलने लगे है, साथ ही सारे देश को अपना समझने लगे है।

हाँ, तो मैं कह रहा था कि चाचा जी को कश्मीर जाते देख मैं भी ज़िद पर अड़ गया कि मैं भी हनीमून पर जाऊँगा। मेरी माँ ने मुझे समझाया कि बेटा! अच्छे बच्चे हनीमून पर नहीं जाया करते। तब मेरे पिताजी मुझे बहलाने का लिए हनुमान जी के मन्दिर ले गये, हनुमान जी को भी हनीमून से परहेज़ था यह बात और थी कि उनके परम भक्त तथा उस मन्दिर के पुजारी और उनके बीच इस मामले में गहरे मतभेद थे और यह सब उन महिला भक्तिनों के कारण था जो उस मन्दिर में हनुमान जी के दर्शन करनें आती थीं। जितनी देर वे हनुमान जी के दर्शन करतीं पुजारी जी उनके दर्शन कर लिया करते थे।

मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मैं भी हनीमून मनाने के लिए कश्मीर गया हूँ। वहाँ आतंकवादियों ने मेरा अपहरण कर लिया है। रोज़ फिल्म की तरह मेरी पत्नी भी उनके पीछे-पीछे भाग रही है। आतंकवादी मुझे यातना दे रहे हैं। "साला हिन्दोस्तानी, हमारे कश्मीर को हनीमून का अड्‌डा समझ रखा है, जो देखो चला आ रहा है यहाँ हनीमून मनाने। तुम सब इसे नापाक़ बनाने पर तुले हो और हम इसे पाक़ बनाना चाहते हैं।" लो हो गया हनीमून। अरे जब मणि रत्नम नहीं मनवा सके तो हम क्या मनाते। कश्मीर में आतंकवाद का शायद एक कारण यह भी हो सकता है कि सब वहाँ हनीमून मनाने पहुँच जाते हैं।

मैं सोचता हूँ यदि मेरा हनीमून नेपाल में होता तो कैसा होता। नेपाल का नाम आते ही मेरी आँखों की आगे मनीषा कोईराला का चेहरा सामने आ जाता है। सुना है नेपाल एक हिन्दू राष्ट्र है, चलो इससे कम से कम उन लोगों को तो जो भारत को भी हिन्दू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं यह जान कर संतोष होगा कि अपने देश का एक नवयुवक पाश्चात्य देशों का मोह त्याग कर एक हिन्दू राष्ट्र में अपना हनीमून मना रहा है। एक सच्चे हिन्दू की यही पहचान है कि वह महत्वपूर्ण काम के क्षणों में भी अपने हिन्दुत्व को न भूले।

आप सब सोच रहे होंगे कि जिस प्रकार किसी घटना के घटते ही कुछ कवि अथवा लेखक उस पर कविता या लेख लिखने बैठ जाते है यह शख़्स अभी तक उस भारतीय विमान अपहरण काण्ड पर क्यूँ नहीं आ रहा है जिसे अपहरण करके नेपाल से कांधार ले जाया गया था। साथियो! मामला वाक़ई बहुत गम्भीर था आखिर सवाल नेपाल से हनीमून मना कर वापस लौट रहे अपने देश के बेटे-बहुओं की सुरक्षा का था जो विदेश की भूमि पर बंधक थे। हमारी सरकार भी बहुत चिंतित थी। सरकार अक्सर बहुओं के मामले में चिंतित हो जाया करती है चाहे फिर वो विदेश की भूमि पर स्वदेशी बहू हो या स्वदेश की भूमि पर विदेशी बहू। चलिये अच्छा हुआ मामला रफ़ा-दफ़ा हो गया । आतंकवादियों ने 3 के बदले 156 को छोड़ दिया हमारी सरकार ने तो 273 के लिए 370 को छोड़ दिया है।

विमान अपहरण के पश्चात तो हवाई जहाज से हनीमून के लिए नेपाल जाने का ख़तरा और भी बढ़ गया है हालाँकि ख़तरा जाने में नहीं वरन वहाँ से आने में है और फिर हम जैसे मध्यमवर्गीय परिवार के लोग तो हवाई यात्रा से कहीं भी हनीमून पर जाने की सोच भी नहीं सकते आखिर सबकी बेटियों के बाप इतने सक्षम भी नहीं होते कि दहेज के साथ वे हवाई जहाज का टिकट भी दे सकें। वैसे भी विमान अपहरण तथा विवाह में कोई विशेष अंतर नहीं है फ़र्क बस इतना है कि एक में नियंत्रण में लेने के बाद माँग की जाती है और दूसरे में माँग पूरी हो जाने के बाद नियंत्रण में लेते हैं।

मेरे एक मित्र ने सलाह दी कि तुम नेपाल रेल से चले जाओ। मैंने तब सोचा कि जब हमारे प्रधानमंत्री ने इस कार्य को लिए भारतीय रल का उपयोग नहीं किया तो मैं क्यों करूँ। एक और सुझाव आया कि कार से जाया जाये परन्तु उसमें भी एक समस्या थी कि रास्ते में बिहार से गुज़रना पड़ेगा और हो सकता है कि .... वहाँ कुछ भी हो सकता है।

मेरे एक अन्य बुद्धिजीवी मित्र बोले कि तुम्हें हनीमून के लिए नेपाल जाने की क्या आवश्यकता है। समाज के कुछ ठेकेदारों ने तो अपने देश में ही हर जगह ऐसी व्यवस्था कर रखी है जहाँ नेपाली कन्यायें आपको हनीमून के लिए आमंत्रण देतीं रहतीं है और उनके बहादुर भाई रात-रात भर जाग-जाग कर इस क्रिया को सम्पन्न कराने में सहयोग प्रदान करते रहते हैं। यहाँ तो हर शहर गाँव बस्ती में नेपाल बसा है। जब जी चाहे, जहाँ जी चाहे, मना लो हनीमून।


अपनी प्रतिक्रिया लेखक को भेजें