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ISSN 2292-9754

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02.27.2016


अपनी करनी का ज़माना एक दिन फल पाएगा

अपनी करनी का ज़माना एक दिन फल पाएगा,
आग कुछ ऐसी लगेगी ये जहाँ जल जाएगा।

हमने यूँ तो ख़ैरियत लिख दी उन्हें मज़मून में,
हम शिकस्ता हाल है उनको पता चल जाएगा।

इतनी बारिश में अगर जो घर तुम्हारा बह गया,
फ़िक्र मत करना ख़ुदा का घर तुझे मिल जाएगा।

उसने अपनी लाश भी चीलों के आगे फेंक दी,
सोच कर इस पुण्य का वो एक दिन फल पाएगा।

हमने पूछा उस जगह अब क्यूँ इबादत बंद है,
हँस के बोले कुछ दिनों तक हादसा टल जाएगा।

डाकिये ने मौत की चिट्ठी न पँहुचाई कभी
ये समझकर ’जो यहाँ आया है सो कल जाएगा’।


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