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09.23.2007
 
उदास गीत कहाँ वादियों ने गाया है
शकुन्तला श्रीवास्तव

 

चला है साथ कभी बादलों में आया है

ये चाँद है कि मेरे साथ तेरा साया है।

 

ये दर्द मेरा है, जो पत्तियों से टपका है

ये रंग तेरा है, फूलों ने जो चुराया है।

 

ये भीगी शाम, उदासी, धुँआ, धुँआ, मंज़र

उदास गीत कहाँ, वादियों ने गाया है।

 

ये हौंसले की कमी थी कि सर झुकाये हुए

वो खाली हाथ समन्दर से लौट आया है।

 

सिसक सिसक के जला है मगर जला तो सही

मेरे चराग़ को आँधी ने आजमाया है।



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