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ISSN 2292-9754

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06.22.2017


वो झरना बनने की तैयारी में है

वह जान गई है
बह निकलने के लिये
तेज़ करना होगा अपना ही वेग,
डरों से डरना नहीं होगा
फुसलावों से बहकना नहीं होगा..
पत्थरों की कठोरता से अब घबराती नहीं वो
अपने में पैदा कर लिया है
उसने इतना शोर
कि सुन ही नहीं पाती
आँधियों की आवाज़ तक..
पूरी निष्ठा से वह जुटी है
झरना बनने की तैयारी में।


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