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ISSN 2292-9754

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01.22.2018


क़ैद करना अरमानों को

बड़ा ख़तरनाक हो जाता है,
अरमानों को क़ैद करना,
सपने न देखना,
किसी को पलटकर कुछ भी
तो न कहना,
पूरी सज़ा सिर्फ़ अपने आपको
ही देना,
शुरू हो जाना अपनी हस्ती को,
अपने हाथों से मिटाना,
वास्ता, दोस्तों का छोड़कर
दुश्मनों को नज़रअंदाज़ करना,
फेंक देना उन ख़ुशगवार नज़ारों
का साथ, जो जीवन में
देखे थे कभी,
मुस्कुरा देना अपने आँसुओं में भी
हँसी को लबों तक आने न देना
अपनों में परायापन तलाशना
और आहों में मुस्कुराहटों को
मिला देना।


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