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ISSN 2292-9754

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03.20.2015


अमीरज़ादों पे नहीं मिला

अमीरज़ादों पे नहीं मिला, शख़्स-ए-आम पे तो मिलेगा
ग़रीब हैं शाह जिस सुकून से, वो आवाम पे तो मिलेगा

ऐ दिल ले आ कहीं से, मुठ्ठी भर प्यार मुझे
माना नहीं धूप सा सस्ता, दिल के दाम पे तो मिलेगा

दिल देकर भी मिला ना, जो कहीं चैन हमें
ग़म-ए-मयखाने में, आँसुओं के दाम पे तो मिलेगा

ना नींद खोकर पाया, ना अश्क बहाकर अगर मिला
वफ़ा ना सही ”सपना”, उसकी बेवफ़ाई के नाम पे तो मिलेगा


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