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ISSN 2292-9754

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12.02.2018


घुटन

लालसाओं का असीम आकाश 
छू लेने की अभिलाषा 
मुट्ठियों में बंद कर लेने की  हठ
उपापोह में घिरा आदमी 
कैसे पा ले 
कैसे छू ले 
भाग रहा मेट्रो रेल की तरह 
कभी सड़क के सामानांतर 
कभी गुफाओं से गुज़र कर 
बस एक ही हैं अंतर 
मेट्रो निर्जीव है और मानव सजीव 
हर जीव की एक ही नियति 
आदमी हो या कुत्ता 
सब जीभ लपलपाते
अपनी शिकार की तलाश में 
व्यग्र / व्याकुल 
न रातों की नींद 
न दिन में चैन 
लोभ का लगाम हाथ में 
फ़ुर्सत कहाँ 
इच्छाओं के 
अश्व को रोकने की 
आख़िर हो भी हो कैसे?
लोभ ने  दी है, दो ही चीज़ें
मौत / या घुटन 


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