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ISSN 2292-9754

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06.07.2017


पिघलता इंद्रधनुष

बरसात के बाद आसमान में इंद्रधनुष निकला था। घर के सबसे छोटे बच्चे से बड़ा बच्चा उसे खिड़की के काँच से आँख लगाये देख रहे थे।

फुलवा वहीं पोंछा लगा रही थी। उसे इंद्रधनुष देखना बहुत पसन्द है।

"अरे फुलवा आ देख कैसा चौड़ा रेनबो उगा है," बच्चे ने कहा।

फुलवा दौड़ कर जाने ही वाली थी कि पीछे से दादी ने टोक लगाई,"अरी टेबल कौन पोंछेगा?"

लगभग 15 बरस की फुलवा वापस आ गयी, टेबल पोंछा...फिर फ़र्श। उसके बाद छोटी मालकिन के कमरे में धूल झाड़ने चली गयी। सब निबटा के जब इंद्रधनुष देखने की गरज से बाहर आई तो, डेढ़ वर्षीय मुन्ना गरजने लगा।

"रे फुलवा," अंदर से फिर दादी की आवाज़ आई। मुन्ना की माँ दफ़्तर जाती है और दादी झटपट उठ नहीं पातीं। ऐसे में मुन्ना की ज़िम्मेदारी फुलवा पर है, और किसी से मानता भी तो नहीं। शुरू से फुलवा की ही गोद में रहा है, एकदम वैसे ही जैसे मुन्ना का बड़ा भाई जो अब साढ़े चार बरस का हो चुका है, रहता था। पर अब भी उसकी फुलवा से बहुत छनती है।

वही बच्चा, मुन्ने का बड़ा भाई अब भी इंद्रधनुष देख रहा था। मुन्ना को सुलाने के बाद जब फुलवा खिड़की पे आई तो इंद्रधनुष महीन हो चला था।

"हमने हमेसा इन्दर धनुस को पिघलते देखा है," बरबस फुलवा के मुँह से निकला।

अगले दिन दादी डेढ़ साल के मुन्ने को माँ कहना सिखा रही थी, मुन्ना बस खिलखिलाता और लड़खड़ाते क़दमों से वो फुलवा के कमरे की तरफ भागता रहा।

मुन्ना का बड़ा भाई प्रीस्कूल से लौटकर आया तो वो भी सीधा फुलवा के कमरे में घुस गया।
"देख फुलवा ऐसा होता है इंद्र धनुष," बच्चे ने अपनी ड्रॉइंग बुक खोलकर दिखाया।

"हाँ ई तो पिघलेगा भी नहीं," कहकर फुलवा हँस पड़ी।

शाम को मुन्ने के माँ-बाप ने फैसला लिया की अब माँ नौकरी नहीं करेगी, बच्चों के साथ रहेगी। माँ द्वारा स्वहित में ली गयी बेरोजगारी ने न चाहते हुए भी फुलवा को बेरोज़गार कर दिया।

शाम की गाडी से उसे गाँव भेज दिया गया।

"बोल मुन्ना माँ!" दादी और मुन्ने की माँ मुन्ने से मिन्नतें कर रहे थे, मुन्ना फिर लड़खड़ाते हुए फुलवा के कमरे की ओर भागा। दादी ने रोकना चाहा तो माँ ने मना कर दिया।

"अरे जाने दीजिये माँ जी खेलेगा तभी सीखेगा।"

मुन्ना फुलवा के कमरे के दरवाज़े पर खड़ा होकर बोला 'मा'! पहली बार...नज़रें दरवाज़े की ओर थीं।

इधर हाथों में इंद्रधनुष की ड्राइंग पर आँसू गिर रहे थे, काग़ज़ का इंद्र धनुष भी पिघल रहा था।


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