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ISSN 2292-9754

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01.29.2018


परवरिश के दायरे

यह समाज जिसमें हम रहते हैं
हमारा आश्रय केंद्र है
टर्म कंडीशन के मुताबिक
यहाँ व्यक्तिगत संज्ञा वर्जित है

सुचारू व्यवस्थाओं के पालन हेतु
परिवार प्रथम इकाई बताए गए
जहाँ हमें फलना-फूलना था

इस हेतु एक ख़ूब भला दायरा निर्मित किया गया
जहाँ ऊँचे उछल-कूद की सुविधा दी जाती
तो भी दायरे में ही
हमें खेलने होते थे बहुत से खेल
रटनी होती थी बहुत सी बातें
साथ ही ख़्याल रखना होता था कि दायरे से बाहर न जाएँ
(यहाँ का अनोखा नियम यह था कि दायरा पार कर जाने पर हमें खेल से बाहर नहीं किया जाता)

इस तरह परिवार लगातार हमें
उच्च से उच्चतर बनाना चाहते थे

आदर्श बनने हेतु नियम पालन अनिवार्य था
कि हम सारे अधिकार उनके हाथ में सौंप दें
जिससे हमें बेहतर सुरक्षा दी जा सके
और इसी तरह हम जान सके
कि हमारे अधिकार ही हमारे सबसे बड़े शत्रु हैं

परिवार की परस्पर विरोधी प्रवृतियाँ
और नातेदारों की अप्रिय उपस्थिति के बीच
हमारे मन में
'अनुराग' और 'झगड़ा'
साथ-साथ पल रहे थे

सबकी अपनी अपनी कुंठाएँ थी लेकिन -
नकारना किसी को मुनासिब न था
और इस कड़ी में परिवार सहज ही
हमारी 'शक्ति' और 'कमज़ोरी' बन गए

'कमज़ोरी' अच्छी बात नहीं
परिवार को 'शक्ति' ही बनना चाहिए
यह बात हम सभी की समझ में आती थी
लेकिन ज़बान पर नहीं

इस तरह हम मूक-प्रत्यक्षदर्शियों को
परिवारों ने सबसे अधिक प्रभावित किया,
और पसंद भी।


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