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04.18.2014


जैसे भी हो, थोड़े-बहुत उजाले

जैसे भी हो, थोड़े-बहुत उजाले रखना जी।
एक दिया कम से कम घर में बाले रखना जी।

सबके अंदर एक जानवर छुपकर बैठा है
आठों पहर द्वार पर उसके ताले रखना जी।

हैवानी आँधी सिर पर चढ़ने को आई है,
इंसानी जज़्बे को ज़रा संभाले रखना जी।

दुख की टीस सदा जीने की ताकत देती है
जबतक मुमकिन हो ्पाँवों में छाले रखना जी।

न जाने किस व्क़्त ज़रूरत आन पडे उनकी
सुनो, हमारे हिस्से देस-निकाले रखना जी।


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