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04.20.2014


आसमान की ऊँचाई पाकर

आसमान की ऊँचाई पाकर भी बादल रोता है।
अपने हिस्से का दुःख आखिर सबको सहना होता है।

औरों की बातें तो सारी बातें ही रह जाती है,
तन्हाई में अपना सीना, अपना बोझा होता है।

पेड़ हरा हो जब तक, पँछी नीड़ बसाने आते हैं,
और ठूँठ हो जाए तो पत्ता भी वैरी होता है।

सपनों की दुनिया कितनी भी सुंदर क्यों न हो लेकिन
सपनों से आँखों का रिश्ता पल दो पल का होता है।

कभी-कभी ऐसा भी वक़्त गु्ज़रता है अपने पर जब
रूह कहीं पर होती है और जिस्म कहीं पर होता है।


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