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ISSN 2292-9754

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12.23.2018


सड़क

 सावधानी से सड़क पर चलें तो
यह दिर्घायु की देती है दुआएँ
जान माल को पहुँचाती है
गन्तव्य तक
जगह-जगह सुरक्षा संदेश पढ़ाती है
तख्तियों पर पल-पल बचने के
सिखाती है गुर
लेकिन कौन सुनता है?

जो गाड़ी में बैठा हो
वह तो होता है राजा भोज
हवा से करता है बातें
पर उतावलेपन से सड़क को है
सख़्त नफ़रत
तब तो वह बन जाती
काली ज़हरीली नागिन
रोम-रोम में उग आते हैं फन
डसने लगती है असंख्य जनों को
यमराज ढोने लगता है
मृत आत्माओं को
और भौंकनें लगते हैं कुत्ते ज़ोर-ज़ोर से


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